Thursday, March 15, 2007

आई एम बैक

भाई लोगों अपुन की लाईफ की सेड स्टोरी ऐसी है कि टू टाईम्स अपुन ने ट्राई मारा हिंदी में लिखने की, लेकिन दोनो बार गूगल ने अपनी वाट लगा डाली. पन अपुन ने हिम्मत नही हारा, और एक बार फिर स्टार्ट. सिर्फ तुम लोगो के लिए कुछ दोहें, जो बचपन में अपुन का टीचर अपुन को पढाएला था

2 comments:

Sharan Sharma said...

कया लिखेला है बाप। मजा आया...

doubtinggaurav said...

शरन भाई बस क्या